New SIM Card Rules 2026: 1 जनवरी से ‘पेपर-आधार’ वाले सिम कार्ड्स पर संकट, कहीं आपकी सर्विस भी तो ‘साइलेंट मोड’ पर नहीं जा रही?

सोचिए, आप किसी जरूरी काम से घर से निकलें, UPI से पेमेंट करने लगें और अचानक फोन की स्क्रीन पर ‘No Service’ आ जाए. यह कोई तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि 1 जनवरी से लागू हुए नए ‘क्लीन-अप’ अभियान का असर हो सकता है. सरकार का नया सिस्टम अब एक्टिव हो चुका है, और निशाने पर हैं वो नंबर जो वेरिफिकेशन के पुराने नियमों पर चल रहे हैं.

क्या बदल गया है 48 घंटे पहले?

अब ‘दुकानदार की पहचान’ पर सिम नहीं मिलेगी. 48 घंटे पहले जो बदलाव हुआ है, वो सीधा है—कागजी फॉर्म अब रद्दी बन चुके हैं. अगर आपका सिम कार्ड पुराने, धुंधले दस्तावेजों या ‘बल्क-कनेक्शन’ (Bulk Connection) के तहत लिया गया था, तो टेलीकॉम कंपनियों के रडार पर आपका नंबर सबसे ऊपर है. सरकार ने स्पष्ट कर दिया है: या तो 100% डिजिटल वेरिफिकेशन, या फिर कनेक्शन कट.

1 जनवरी से, अगर आपके आधार कार्ड (Aadhaar Card) पर तय सीमा से ज्यादा सिम कार्ड एक्टिव पाए गए, तो आपको कोई चेतावनी नहीं मिलेगी—सीधे आउटगोइंग बंद की जा सकती है. और सबसे बड़ी बात, अब नई सिम खरीदना ‘दाल-चावल’ खरीदने जैसा आसान नहीं रहा. पेपर फॉर्म का किस्सा अब पूरी तरह खत्म हो चुका है; अब सिर्फ बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन ही चलेगा.

चिंता की बात क्या है? (The Reality Check)

जरा सोचिए, आपका वह पुराना नंबर जो आपके बैंक अकाउंट, आधार और यूपीआई (UPI) से लिंक है, अगर वह अचानक ‘बंद’ हो जाए तो?

आजकल हम में से कई लोग ऑफर के चक्कर में या परिवार के लिए अपने नाम पर सिम ले लेते हैं और फिर भूल जाते हैं. खतरा यहीं है. दूरसंचार विभाग (DoT) का नया AI सिस्टम अब उन नंबर्स को स्कैन कर रहा है जिनका उपयोग संदिग्ध है या जिनका री-वेरिफिकेशन (Re-verification) लंबे समय से नहीं हुआ है. अगर आपके पास भी कोई ऐसा सिम है जो आपके नाम पर है लेकिन कोई और चला रहा है, तो अब सतर्क होने का वक्त आ गया है.

सबसे बड़ा खतरा: ‘घोस्ट सिम’ (Ghost SIM)

क्या आप जानते हैं कि भारत में लाखों लोग ऐसे हैं जिनके नाम पर 5-6 सिम चल रहे हैं और उन्हें खबर तक नहीं? अगर आपके आधार कार्ड पर कोई ऐसा ‘लावारिस’ नंबर एक्टिव मिला जो किसी साइबर अपराध में इस्तेमाल हो गया, तो पुलिस आपके दरवाजे पर होगी, सिम यूजर के नहीं.

राहत की खबर: आपको क्या करना है?

घबराने की जरूरत नहीं है, बस थोड़ी सावधानी चाहिए.

  1. चेक करें: संचार साथी (Sanchar Saathi) पोर्टल पर जाकर तुरंत चेक करें कि आपके आधार पर कुल कितने नंबर चल रहे हैं.
  2. सफाई करें: अगर कोई ऐसा नंबर दिखता है जिसे आप नहीं पहचानते, तो उसे वहीं से तुरंत रिपोर्ट करके ब्लॉक करवा दें.
  3. KYC अपडेट: अगर टेलीकॉम कंपनी से कोई मैसेज आया है, तो उसे ‘स्कैम’ समझकर इग्नोर न करें. हो सकता है वह आपके नंबर को बचाने के लिए आखिरी चेतावनी हो.

जाते-जाते…

मोबाइल अब सिर्फ बात करने का जरिया नहीं, हमारी डिजिटल पहचान है. नियम कड़े जरूर हैं, लेकिन हमारी सुरक्षा के लिए ही हैं. 2026 की शुरुआत एक साफ-सुथरे डिजिटल रिकॉर्ड के साथ करें, ताकि आपका नेटवर्क और आपका पैसा, दोनों सुरक्षित रहें.

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