Budget 2026 Income Tax Rebate: मिडिल क्लास की सुनी गई? Tax Rebate की लिमिट ₹7 लाख से बढ़कर ₹10 लाख होने की चर्चा तेज!

क्या 1 फरवरी को मिडिल क्लास का 3 साल लंबा वनवास खत्म होने वाला है?
वित्त मंत्रालय के अंदरखाने से जो संकेत मिल रहे हैं, वो साधारण नहीं हैं। चर्चा अब ‘क्या होगा’ पर नहीं, बल्कि ‘कितना होगा’ पर शिफ्ट हो चुकी है। अगर आप भी ₹7 लाख की लिमिट में घुट रहे थे, तो यह खबर आपके लिए ‘Game Changer’ साबित हो सकती है।पिछले तीन सालों से कर रहा था।

क्या इस बार सरकार हमारी जेब में ज़्यादा पैसा छोड़ने वाली है? आइए देखते हैं अंदर की बात क्या है।

क्या टूटेगी ₹7 लाख की दीवार?

पिछले बजट में ‘नई टैक्स रिजीम’ के तहत ₹7 लाख तक की आय को टैक्स-फ्री किया गया था। वह एक बड़ा कदम था। लेकिन सच यह भी है कि 2023 से 2026 आते-आते महंगाई ने उस राहत को काफी हद तक सोख लिया है।

अब खबरे हैं कि सरकार इस लिमिट को बढ़ाकर सीधे ₹10 लाख करने पर गंभीरता से विचार कर रही है।

जी हाँ, आपने सही पढ़ा। अगर यह प्रस्ताव पास होता है, तो इसका सीधा मतलब है कि जिसकी सालाना कमाई 10 लाख रुपये तक है, उसे टैक्स के नाम पर ‘शून्य (Zero)’ देना पड़ सकता है। यह सिर्फ एक राहत नहीं, बल्कि सैलरी क्लास के लिए किसी जैकपॉट से कम नहीं होगा।

सरकार की मजबूरी: आपकी जेब भरना अब ‘Option’ नहीं रहा

सरकार यह बदलाव समाज सेवा के लिए नहीं, बल्कि मजबूरी में कर सकती है।

सच कड़वा है—बाज़ार में सन्नाटा है। लोग कार नहीं खरीद रहे, बाज़ार में पैसा नहीं घूम रहा। सरकार को समझ आ चुका है कि अगर देश की इकोनॉमी को दौड़ाना है, तो मिडिल क्लास की जेब में पैसा छोड़ना ही होगा।

यह गणित साफ़ है: जब टैक्स बचेगा, तभी तो बाज़ार में पैसा खर्च होगा। इसलिए, ₹10 लाख की लिमिट अब सिर्फ एक मांग नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की ‘Oxygen’ बन चुकी है।

सिर्फ एक नंबर नहीं, एक ज़रूरत

सच कहें तो, यह बदलाव अब लक्जरी नहीं, मजबूरी लग रहा है।

एक आम नौकरीपेशा इंसान, जो शहर में रेंट, EMI और बच्चों की स्कूल फीस के भारी-भरकम खर्चों के बीच झूल रहा है, उसके लिए पुरानी लिमिट्स अब नाकाफी साबित हो रही हैं। ₹10 लाख की लिमिट का मतलब होगा महीने के हाथ में कुछ हज़ार रुपये एक्स्ट्रा बचना। और हम सब जानते हैं कि महीने के आखिरी दिनों में उन ‘कुछ हज़ार रुपयों’ की कीमत क्या होती है।

क्या उम्मीद रखें?

हालाँकि, जब तक वित्त मंत्री जी संसद में बजट टैबलेट खोलकर ऐलान नहीं करते, तब तक कुछ भी फाइनल नहीं है। सरकार हमेशा राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और राहत के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती है।

लेकिन इस बार हवा का रुख थोड़ा अलग है। आर्थिक दबाव सरकार को यह बड़ा कदम उठाने पर मजबूर कर सकता है।

एक सोच

1 फरवरी आने में अब ज्यादा वक्त नहीं बचा है। दिल थाम कर बैठिए। हो सकता है इस बार का बजट सिर्फ ‘कागजी’ आंकड़े न होकर, हमारी और आपकी ज़िंदगी में वाकई कुछ ‘असली’ बदलाव लेकर आए।

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